परम पूज्य श्री श्री रवि शंकर जी द्वारा स्थापित आर्ट ऑफ़ लिविंग संस्था आज १५० देशों में फैली हुई है| साधना, सेवा, सत्संग, योग, प्राणायाम व ज्ञान के माध्यम से लाखों लोग तनाव मुक्त हो रहे हैं| यहाँ आपको इस सुन्दर मार्ग पर चल रहे लोगों के कुछ अनुभव, गुरुदेव का ज्ञान, व अन्य रोचक खबरें मिलेंगी| आप भी अपने अनुभव को अपनी तस्वीर, नाम व परिचय के साथ deartanuj@gmail.com पर ईमेल कर सकते हैं
September 16, 2010
August 30, 2010
1100 किसानों को मिला जैविक खेती का प्रशिक्षण
November 3, 2009
श्री श्री इज़राइल मे
October 16, 2009
2009 कल्चर इन बैलेंस अवार्ड से श्री श्री को नवाज़ा गया
- विश्व सांस्कृतिक फोरम एक द्विवार्षिक समारोह की श्रंखला है जो विभिन्न सांस्कृतिक पहलु के मध्य में उचित संतुलन को स्थापित करने की आवश्यकता का परीक्षण करती है। http://www.wcf-dresden.com
- द कल्चर इन बैलेंस अवार्ड की स्थापना टिबेरियस फोरम द्वारा की गई, जो एक जर्मन संस्था है जो सांस्कृति और अर्थशास्त्र के मध्य में संपर्क को पुन: सशक्त करने के लिए प्रतिबध्द है। http://www.forum-tiberius.com
June 29, 2009
हंगेरी के विश्वविद्यालय ने दिया श्री श्री को सर्वोच्च सम्मान

बंगलूरू. जून 26.2009
आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक व लोकोपकारी पूज्य श्री श्री रविशंकर को स्ज़ेंट इस्ज़्वान विश्वविद्यालय हंगरी ने अपने सर्वोच्च सम्मान “प्रोफेसर हॉनोरिस कॉज़ा (मानद प्रोफेसर) से सम्मानित करा.
श्री श्री, इस समय युरोप के दौरे पर है. वे विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित 10 वीं वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में वक्ता थे. स्ज़ेंट इस्ज़्वान विश्वविद्यालय के उप रेक्टर प्रो डॉ. लैस्ज़लो हॉरनॉक ने श्री श्री को इस सर्वोच्च सम्मान से नवाज़ा.
March 21, 2009
वोट अवश्य डालें
वोट अवश्य डालें
श्री श्री रवि शंकर आध्यात्मिक गुरु
आज हमें ऐसे नेताओं की ज़रूरत है जो सत्यदर्शी, समदर्शी, प्रियदर्शी और दूरदर्शी हों। ऐसा लीडर जिसके पास मिशन और विज़न हो। जिसमें बलिदान, संवेदना और कमिटमेंट की भावना हो। वह ईमानदार और खुले दिमाग का होना चाहिये। जो अपने बारे में सोचने से पहले देश हित के बारे में सोचने वाला हो। हमें देखा कि कैपिटलिज़्म, कम्युनिज़म और सोशलिज़म सब फ़ेल हो गये हैं। अब ह्यूमनिज़्म और स्प्रिचुअलिज़्म का वक्त है। बिना मानवता और अध्यात्म के राजनीति गन्दी हो रही है। राजनीति के बिगड़ते स्वरूप से लोग इससे दूर जा रहे हैं। अगर अच्छे, समझदार और पढ़े लिखे लोग वोट नहीं देंगे तो बाकी दूसरे वोट शराब और पैसों से खरीद लिए जाएंगे और हम देखेंगे कि पूरे देश में मनी पावर और मसल पावर का राज हो गया है। इसलिये अच्छे नेताओं को चुनें जो देश को बेहतर कर सकते हैं।
February 7, 2009
January 21, 2009
अरुणाचल दौरा
“प्रभात की अरुणिमा में उनकी मुरली की शांति धुन अभी तक मंत्रमुग्ध कर रही है...” शीर्षक से एक लोकप्रिय दैनिक पत्र ने परमपूज्य श्री श्री रविशँकर के एक सप्ताह लम्बे दौरे को प्रकाशित किया इस लेख ने भारत के सबसे पूर्वी राज्य में किये गए इस दौरे के भाव को कुशलतापूर्वक चित्रित किया।
इस आगमन के दौरान श्री श्री ने एक समृद्ध एवं शांत अरुणाचल प्रदेश के निर्माण के लिये एक प्रक्रिया प्रारम्भ की जिसमे वहां की स्थानीय जनसंख्या को सम्मिलित किया, विशेषतौर पर युवाओं को। इस सतत विकासशील पहल को क्रियान्वित करने के लिये और राज्य की पारम्परिक संस्कृति एंव प्रोत्साहन करने के लिये एक दीर्घकालिक अंतर दृष्टि प्रदान की।
भारत को भौगोलिक दृष्टि से अरुणाचल प्रदेश केवल एक सामरिक महत्व का स्थान रखता है अपितु यहाँ लोगों की मनःस्थिति पर भी विस्मयकारी प्रभाव डालता है।उनके लिये यहाँ “उगते सूर्य का प्रदेश” भी है। भारत हर सुबह सर्व प्रथम अरुणाचल में ही जागता है।
आगमन के समय जब अरुणाचल प्रदेश की मिश्रित संस्कृति एवं सामांजस्य लिये हुए विविधता , जो तीन देशों की अंतराष्ट्रीय सीमाओं से घिरा है- म्यामार, भूतन, और चीन परिणमस्वरूप ये न केवल बाह्य दबाव से गुजर र्हा है अपितु आंतरिक दबाव्से भी ग्रसित है। अरुणाचल प्रदेश की समृद्ध संस्कृति की सराहना करते हुए श्री श्री ने कहा,”पुरातन विश्वास एवं संस्कृति विश्व की धरोहर हैं जिन्हें संरक्षित करने की आवश्यकता है” उन्होंने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग इन्हें न केवल अरुणाचल प्रदेश में अपितु पूरे देश एवं विश्व में लोकप्रिय बनाने के लिये वहां के स्थानीय समुदायों के साथ कार्य करेगा।
इस राज्य में अपने प्रवास के दौरान श्री श्री ने ईटानगर, पासीघाट,और तवांग के अनेक जन आयोजनों में सम्मिलित हुए और सामाज के विभिन्न वर्गों के लोगों से समपर्क एवं अंतर्वाता की। पासीघाट में श्री श्री ने त्रिदिवसीय- पारम्परिक युवामहोत्सव को सम्बोधित किया और पारम्परिक नेताओं से वार्ता की, कि युवाओं को अपनी जड़ों का सम्मान करना चाहिये न कि उन पर शर्मिन्दा होना चाहिये। वहां के लोगों ने हर कदम पर श्री श्री का पूरी गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। अपनी अंतर्वाता के दौरान श्री श्री ने पुरातन विश्वासों को संरक्षित करने एवं विविधताऑं का सम्मान करने की आवश्यकता पर बल दिया।
2 दिसम्बर को गुरूजी ने तवांग की यात्रा की एवं एक बड़े सार्वजनिक समारोह को सम्बोधित किया। श्री श्री ने दृढतापूर्वक कहा की कोई भी ताकत अरुणाचल प्रदेश को भारत से अलग नहीं कर सकती क्योंकि यह “उगते सूर्य का प्रदेश” भारत का हिस्सा है(“चीन पूरे भारत का प्रिय बने और हमसे हाथ मिलाए, नाकि हमसे भूमि के एक टुकड़े को त्याग करने को कहे।)
श्री श्री के सार्वजनिक आयोजनों के दौरान तवांग के ऑफिस और व्यापारिक प्रतिष्ठानों ने अपने कार्यों को स्थगित करके गुरुजी का महान स्वागत किया। उन्होंने तवांग के बौद्ध स्तूप का दौरा किया और वहां के भिक्षुऑं स अंतर्वाता की। उन्होंने 1962 में चीन के विरुद्ध अपने देश कि रक्षा करते हुए शहीद सैनिकों के प्रति अपनी श्रद्धांजलि भि अर्पित की।तवांग आगमन के दौरान श्री श्री ने मुख्य मंत्री डोरी खाण्डू से उनके आवास पर एक घंटे लम्बी अत्यंत महत्व्पूर्ण मुलाकात की तत्पश्चात उनके साथ ईटानगर वापस चले गए।
श्री श्री ने ईटानगर में एक अनूठी कार्यशाला का संचालन किया जिसमें लोगों को स्वस्थ, सुखी, एवं अर्थपूर्ण जीवन जीने के रहस्य बताए गए।विभिन्न पृष्ठ्भूमियों के करीब 4000 लोग इस “हेल्थ ऐंड हैपिनैस” कार्यशाला में सम्मिलित हुए जहाँ श्री श्री ने प्रतिभागियों को प्राणायाम , योग और ध्यान कि शांति पूर्ण दुनिया से परिचित कराया। उन्होंने “ विस्ड्म ऐंड म्युसिक फौर वन वर्ल्ड फैमिली”नाम के समारोह में भी सम्मिलित हुए।
दौरे के अन्य केन्द्र बिन्दू अरुणाचल प्रदेश और अन्य पूर्वोतर राज्यों से आए करीब 1000 युवाओं के लिये आयोजित प्रशिक्षण कर्यक्रम, युथ लीडरशिप ट्रेनिंग कार्यक्रम था युवाओं ने श्री श्री से वार्तलाप की और एक तनाव रहित हिंसा मुक्त विश्व एवं सम्पूर्ण क्षेत्र के ग्रमों के सतत विकास की अचूक पहल के लिये उनके दृष्टिकोण के कृयांवयन के लिये योजनाओं की रूपरेखा बनाई। श्री श्री ने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग इस क्षेत्र के युवाओं को प्रशिक्षित करने एवं रोजगार प्रदान करने के लितये योजना बना रही है।उन्होंने कहा कि आदिवासी जनजातियों मे से चर्यानित युवाओं के युथ लीडर अथवा युवाचार्य बनने के लिये प्रशिक्षण दिया जाएगा।
अपने प्रवास के दौरान श्री श्री ने अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल जे।जे।सिंह से राज्यभवन मे मुलाकात की। ईटानगर के बिशप जौन थौमस काट्रूकुडिविल को भी श्री श्री ने ईटानगर के जूली बस्ती स्थित आर्ट ऑफ लिविंग आश्रम मे बुलाया जहां उन्होंने एक घंटे का समय व्यतीत किया।
श्री श्री ने राज्य मे अपने एक सप्ताह लम्बे दौरे की समाप्ति असहिष्णुता के प्रति सहनशीलता न दिखाने की प्रवृति को प्रोत्साहन करने एवं पुरातन संस्कृति को पोषण करने के आवाहन के साथ की।”भारत की समंजनशीलता एवं सबसे प्रेम करने का पुराना इतिहास है और इसे हर कीमत पर संरक्षित करने की जरूरत है।” उन्होंने ईटानगर छोड्ने से पहले एक प्रेसवार्ता मे कहा।
श्री श्री ने धार्मिक एवं सांस्कृतिक असहनशीलता के बढ़ते स्तर के प्रति अपनी चिंता व्यक्त करते हुए, आध्यात्मिकता के आभाव को इसके लिये दोषारोपित किया। हाल ही मे मुम्बई में हुए आतंकवादी हमले का उल्लेख करते हुए, जिसमे यहूदियों को विशेष तौर पर निशाना बनाया गया था, उन्होंने कहा कि यहाँ भारत के सहनशीलता के इतिहास पर एक बड़ा धब्बा है; क्योंकि यहूदियों को कभी देश मे पीड़ित नहीं रखा गया है। उन्होंने इस पर खेद व्यक्त किया कि आज के राजनेता आतंकवाद एवं धर्मोन्मतता के दमन के लिये कुछ कार्य करने के स्थान पर अपने वोट बैंक को बढ़ाने के लिये अधिक चिंतित हैं। पथभ्रष्ट आतंकवादियों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वो विविधता को सराहें, उन्होंने कहा “भारत विभिन्न रंगों के पुष्पों का गुल्दस्ता है, और इसे नष्ट करने का अधिकार किसी को भी नहीं है।” उन्होंने धार्मिक नेताओं से पथभ्रष्ट तत्वों को शिक्षित करने का आग्रह किया।
विभिन्न विद्यालयों की स्थापना, ऑषधीय वनसपतीयों एवं स्थानीय फलों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने, स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित करना एवं ज्ञान के मंदिरों के निर्माण के लिये योजनाएँ चल रहीं है जिसमे 180 बच्चों का स्कूल् भी चल रहा है। ये एक अन्य उदाहरण है कि कैसे श्री श्री विश्व मे भ्रमण करके सतत सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिये परियोजनाऑं को क्रियाशील करते हैं।
December 29, 2008
श्री श्री का ईराक के शांति कार्यक्रम में सम्बोधन
श्री श्री ने अपने ईराक शांति कार्यक्रम में कहा - “दूसरों के आँसुओं को पोछना हम सभी का कर्तव्य है ।”
बैंगलोर, दिसंबर २३, २००८.
आध्यात्मिक तथा मानवीय मूल्यों के प्रेरक तथा आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता, परम पूज्य श्री श्री रविशंकर राजनैयिक तथा धार्मिक प्रमुखों के साथ अपने शांति कार्यक्रम के अंतर्गत तीन दिन की ईराक प्रवास पर हैं । वह युद्ध से क्षत इस देश में आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा चलाए जा रहे मानवीय कार्यक्रमों का भी अवलोकन करेंगे ।
बगदाद पहुँच कर श्री श्री ने शीया राजनैतिक परिषद के प्रमुख, माननीय हुसैन अल मुसावी से भेंट की । शिया प्रमुख ने श्री श्री से उनके द्वारा चलाए जा रहे, हितकारी कार्यक्रमों को जारी रखने तथा विषेशतः भारत से और अधिक चिकित्सकों को ईराक भेजने का आग्रह किया, जिनकी आज इराक में कमी है । जिसे श्री श्री ने स्वीकार किया । संस्था ने २००३ में युद्ध के तत्काल बाद ही बहुत से चिकित्सकों को भारत से भेजा था । श्री श्री ने कहा, “ईराक के लोगों ने बहुत त्रासदी सही है । आर्ट ऑफ लिविंग संस्था, लोगों से तनाव कम करने/दूर करने के सहायता कार्यक्रमों को जारी रखेगी, तथा ईराक के लोगों को प्रशिक्षित करेगी जिससे वे सभी सशक्त बनें । हम सभी ईराकियों को आनंदित देखना चाहते हैं ।”
तत्पश्चात श्री श्री आर्ट ऑफ लिविंग महिला सशक्तिकरण प्रशिक्षण शिविर गए तथा महिलाओं को सिलाई आदि के प्रशिक्षण के लिए दी जा रही विभिन्न सुविधाओं का अवलोकन भी किया ।
शाम को उन्होंने ईराकी राष्ट्रीय काँग्रेस के सभापति तथा ईराक के पूर्व उपप्रधानमंत्री माननीय अहमद चलाबी के आतिथ्य में आयोजित निजी रात्रिभोज में भाग लिया तथा ईराकी युवाओं की सहायता के लिए विभिन्न उपायों पर चर्चा की । श्री श्री कल महिलाओं तथा युवाओं के सशक्तिकरण के लिए विभिन्न कार्यक्रमों को कार्यान्वित करने के लिए, युवा मंत्रालय के साथ एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करेंगे ।
अपने तीन दिन के प्रवास में श्री श्री ईराक के उपप्रधानमंत्री, युवा, स्वाथ्य तथा न्याय मंत्री एवं प्रबुद्ध धार्मिक नेताओं से भी मिलेंगे । वे कर्बला भी जाएंगे जहाँ वे क्षेत्र के राज्यपाल से मिलेंगे ।
मई २००७ में अपनी ईराक यात्रा के दौरान श्री श्री प्रधान मंत्री के अतिथि के रूप में ग्रीन ज़ोन में रहे थे । इस बार उन्होंने रेड ज़ोन में रहने का निर्णय किया ताकि जनसामान्य आसानी से उन्हें मिल सकें ।
September 17, 2008
श्री श्री और नेपाल के प्रधानमंत्री की हुई बैठक

श्री श्री और नेपाल के प्रधानमंत्री की हुई बैठक
नेपाली प्रधानमंत्री पुष्पा कमल दहल उर्फ प्रचंड और प्रख्यात आध्यात्मिक नेता पूज्य श्री श्री रविशंकर की मुलाकात सोमवार को नई दिल्ली में हुई । बैठक के दौरान श्री श्री ने नेपाल को एशिया का स्विट्ज़रलैंड बनाने की दृष्टि से पर्यटन को बढ़ावा देने और नेपाल की समृद्ध विरासत के संरक्षण के जरूरत पर बल दिया।
संभाषण की शक्ति प्वाइंट ऑफ़ पीस शिखर सम्मेलन, स्टैवेंजर, नार्वे
श्री श्री ने नोबल शांति पुरुस्कार से सम्मानित लोगों को किया उद्बोधनकहा कि संसार में संघर्ष समाप्त करने के लिये संभाषण और मध्यस्थों का होना ज़रूरी
स्टैवेंजर, नार्वे 12 सितम्बर , 2008: विश्व विख्यात मानवीय और आध्यात्मिक नेता और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक परम पूज्य श्री श्री रविशंकर ने परस्पर संवाद की शक्ति पर जोर देते हुए कहा कि दुनिया में संघर्ष को अंत करने का यही उचित हल है।
वे सरकार द्वारा प्रायोजित प्वाइंट ऑफ़ पीस शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे जो पूर्व में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित लोग और संघर्ष के समाधान के विशेषज्ञों के बीच स्टैवेंजर, नार्वे में हो रही बैठक है। श्री श्री ने ज़ोर दिया कि मध्यस्थता द्वारा झगड़ते दलों को प्रभावी तरह से बातचीत पर लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि "आज विश्व में मध्यस्थों को बनाने की और परस्पर संवाद की एक बहुत अधिक आवश्यकता है। मध्यस्थ की भूमिका महत्वपूर्ण है और उसे बिना खुद को अधिरोपित करे हुए एक उत्प्रेरक की भूमिका निभानी है।"
इन योग्य और शांति के विश्व विख्यात नेताओं को संबोधित करते हुए , श्री श्री ने बताया है कि वह और आर्ट ऑफ लिविंग हिंसक प्रवृत्ति में सुधार और संवाद को बढ़ावा देने के पूरे विश्व में किस प्रकार कार्यरत हैं । तनाव को दुनिया में संघर्ष का मूल कारण बताते हुए, उन्होंने इस बात पर बल दिया कि तनाव को जड़ से हटाने वाली विधियों को अपनाया जाए।" “तनाव आपसी संचार में बाधा पैदा करता है। बातचीत के लिए किसी भी एक मध्यस्थ के होने की जरूरत है, और मध्यस्थ की कुशलता से सफल संवाद होता है।“
“किसी संघर्ष में हमेशा गलत सूचना, अफ़वाहें, और आंदोलन शामिल होते है। मध्यस्थ को आवश्यक्ता है कि वह लोगों को सुने और उनमें उम्मीद जगाए। सबसे ज़रूरी है कि मध्यस्थ परिस्थिति को भली भांति समझे ताकि मामला और अधिक नहीं भड़के।“
“अधिकांश संघर्ष किसी पहचान को बनाने के लिये आधारित होते हैं : हम अपनी पहचान को किसी धर्म, संस्कृति, भाषा आदि के साथ जोड़ लेते हैं और हम भूल जाते हैं कि हम सभी पहले इंसान हैं। धर्म, राष्ट्रीयता, लिंग आदि इंसानियत के बाद आते है। इस सीमित पहचान का गलत रस्ता लोगों को मरने मारने के लिए भी तैयार कर देता है। अमरीका में हुए 9/11 हमले के बाद अपने भय, अविश्वास और संघर्ष को जीतने के लिये हमें इस संकीर्ण विचारधारा से आगे निकलना होगा। आतंकवाद को समाप्त करने के लिये दूरदर्शी होकर हमें अपने बच्चों को बहुसांस्कृतिक व बहुधार्मिक शिक्षा देने होगा।"
यह तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन स्टैवेंजर शहर को दिये “2008 की यूरोपीय सांस्कृतिक राजधानी” उपाधि का एक हिस्सा है। बहुत बड़ी संख्या में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित जन एकत्रित हुए और विचारों का आदान प्रदान करा। श्री श्री को “संभाषण की शक्ति - 9/11 और उसके बाद क्या” विषय पर अपने विचार प्रकट करने के लिए आमंत्रित किया गया था। उनके अलावा पैनल में शामिल थे – दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति महामहिम किम दे जंग, नार्वे के पूर्व प्रधानमंत्री क्जेल माग्ने बॉंडेविक और अन्य।



