परम पूज्य श्री श्री रवि शंकर जी द्वारा स्थापित आर्ट ऑफ़ लिविंग संस्था आज १५० देशों में फैली हुई है| साधना, सेवा, सत्संग, योग, प्राणायाम व ज्ञान के माध्यम से लाखों लोग तनाव मुक्त हो रहे हैं| यहाँ आपको इस सुन्दर मार्ग पर चल रहे लोगों के कुछ अनुभव, गुरुदेव का ज्ञान, व अन्य रोचक खबरें मिलेंगी| आप भी अपने अनुभव को अपनी तस्वीर, नाम व परिचय के साथ deartanuj@gmail.com पर ईमेल कर सकते हैं
August 30, 2010
1100 किसानों को मिला जैविक खेती का प्रशिक्षण
August 13, 2009
आयुर्वेद स्वाइन फ़्लू का इलाज - श्री श्री
''आयुर्वेद स्वाइन फ्लू का प्रभावकारी मुकाबला कर सकता है'' श्रीश्री
बैंगलुरु, 12 अगस्त 2009, आतंकित न होने के लिये आग्रह करते हुए, द आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक परम पूज्य श्री श्री रविशंकर जी ने एक प्रेस विज्ञप्ति मे कहा '' भारत के पास ''आयुर्वेद के ज्ञान का वैभव है जो स्वाइन फ्लू का मुकाबला कर सकता है''
इस पर विस्तार से चर्चा करते हुए श्री श्री आयुर्वेद केन्द्र के वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक ड़ॉ मणीकांतन एवं ड़ॉ निशा मणीकांतन ने बताया कि ''स्वाइन फ्लू शरीर मे प्रतिरक्षा के बिगड जाने से आक्रमण करता है । आयुर्वेद सरल और प्रभावशाली उपाय बताता है जो प्रतिरक्षा और प्रतिरोध के निर्माण मे बढ़ोत्तरी करता है । लक्ष्मी तरु ( वनस्पति शास्त्र का नाम -सीमारुबा) की पत्तियो की चाय, तुलसी, ऑवला और अमृत ( गिलोय) प्रतिरक्षा को बढ़ाने का कार्य करते है । इसके अतिरिक्त और वैकल्पिक रुप से अदरक और हल्दी का चूर्ण को नींबू के रस या शहद के साथ दिन मे दो बार लिया जा सकता है ।''
वायु वाहित स्वाइन फ्लू वायरस का मुकाबला करने के लिये सम्बरानी धूप (लोभान की ड़ंठल) को दिन मे दो बार जलाना चाहिये । सम्बरानी बहुत शक्तिशाली वायुमंडलीय निष्कीटक होता है, यह भी चिकित्सको ने कहा ।
श्री श्री ने यह भी कहा '' इसके अतिरिक्त, हमारा मन प्रतिरक्षा मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । जब भी हम आतंकित और भय मे होते है तो हमारा प्रतिरक्षा कर स्तर निचे चला जाता है । प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास हमे शांत रखने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । अखिल भारतीय आर्युविज्ञान ( एम्स, नई दिल्ली), राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान(नीमहंस, बैंगलुरु) मे स्वतंत्र शोध के अनुभव पता चलता है कि प्राण्ाायाम और ध्यान जैसे अभ्यास प्रतिरक्षा मे तीन गुना बढ़ोत्तरी करते है । यदि हम इन अभ्यासो और सरल आयुर्वेदिक नुस्को का समावेश अपने दिनचर्या मे कर ले तो हम स्वाइन फ्लू का आसानी से मुकाबला कर सकते है ।''
June 29, 2009
माओवादी मुद्दा : "वार्ता और आध्यात्मिक शिक्षा ही हल है" - श्री श्री
माओवादी मुद्दा : "वार्ता और आध्यात्मिक शिक्षा ही हल है" - श्री श्री
बंगलूरू. 23 जून, 2009. केन्द्र के द्वारा माओवादियों पर प्रतिबंध पर प्रतिक्रिया देते हुए आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक पूज्य श्री श्री रविशंकर ने आज कहा, "माओवादीयों पर प्रतिबंध लगाने से शायद कोई मदद नहीं मिलेगी. उनकी विचारधारा का सामना वार्ता, प्रेरणा और सबसे महत्वपूर्ण रूप से आध्यात्मिक शिक्षा से किया जा सकता है. किसी को आतंकवादी घोषित करने से हम अपने कृत्यों को सही साबित कर देते हैं पर उनकी मानसिकता में बदलाव नहीं आ पाता."
स्थिति का विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा, "आध्यात्मिक शिक्षा के अभाव की कारण ही माओवाद की वृद्धि हुई है. अधिकांश माओवादी हिन्दु हैं. दुर्भाग्य से, उन्हें अपने ही आध्यात्मिकता के विषय में किसी ने शिक्षा नहीं दी जिसके कारण वे हिंसा के रास्ते पर निकल पड़े. "
युवाओं में आध्यात्मिक शिक्षा की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा, "धर्मनिरपेक्षता के नाम पर, हमने अपनी शिक्षा से पूरी तरह से आध्यात्मिक सामग्री को समाप्त कर दिया है. भारत जिससे पश्चिम देश भी आध्यात्मिकता सीखते हैं उसी देश को आध्यात्मिक शिक्षा की कमी की वजह से नक्सलवाद और आतंकवाद जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है".
इस संदर्भ में उन्होंने सरकार को सभी सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में आध्यात्मिक शिक्षा शुरू करने के लिए आग्रह किया, जो बच्चों को सभी धर्मों के सुन्दर पहलुओं को उजागर करे – तकि बच्चे सभी धार्मिक पृष्ठभूमि के लोगों के प्रति सम्मान रख सकें.
May 23, 2009
हार और जीत
आज, भारत में एक नई सरकार बनी है. इस नई सरकार के लिए दो सलाह हैं:
पहली सलाह उनके लिये जो जीत गये हैं – उन्हें सोचना चाहिये कि 'हम जीत गए, लोगों ने हम पर भरोसा किया है, तो हमें विनम्र होना चाहिए.' विनम्रता बढ़ाएँ. जो लोग हार गये उनको प्यार से देखें. उनके साथ हमदर्दी रखें. युद्ध के समय एक अलग स्थिति होती है : आप लड़ाई लड़ो । लेकिन जब युद्ध खत्म हो गया तब स्थिति भिन्न हो जाती है. दुश्मन को गले लगाओ. घावों पर मलहम लगाओ.
अब जो हार गये उनके लिये सलाह। जब तुम हारते हो तब तुम जो चाहते हो वह नहीं होता. तब फिर कई विकल्प उत्पन्न होते हैं-
कुंठा
अवसाद
क्रोध
ये तीन विकल्प तुम्हें सही रास्ते पर जाने से रोकते हैं, जिसके कारण तुम्हें नुकसान होता है.
चौथा विकल्प है कि, 'यह भगवान की इच्छा है.' इस तरह, हम बुरी भावनाओं से छुटकारा पा जाएंगे, और सकारात्मक कार्य में लग जाओ. मन को शांत कर कुछ रचनात्मक कार्य में खुद को संलग्न कर लो. अवसादग्रस्त होकर कुछ नहीं मिलेगा. अन्यथा न तो स्वयं की प्रगति होती है और न ही है समाज की.
हारी हुई पार्टी को यह सोचना चाहिए कि 'हमने अपनी पूरी कोशिश करी, लेकिन जो होना था, सो हुआ.’
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन:”, अपने कर्म के फल की अपेक्षा किये बिना अपना कर्तव्य करो. जो भी फल मिले उसको स्वीकार करो - भूतकाल के प्रति समर्पण की भावना ही सच्चा समर्पण है. सच्चा समर्पण भगवान पर फल फूल चढ़ाना नहीं है. भगवान के लिए अतीत के कचरे का समर्पण असली समर्पण है. भगवान इस कचरे को फूलों और फल में बदल देते हैं.
इसलिए, भूतकाल पर गुस्सा मत हो, अवसाद में मत जाओ. नफरत का कोई मतलब नहीं है, और कुछ नहीं करने का भी कोई मतलब नहीं है. बुद्धिमानी की निशानी है कि समर्पण करके आगे बढ़ें.
यह हर देश में होता है. जंग होती है, कोई जीतता है और कोई हारता है.
जो जीते उन्हें अधिक विनम्रता दिखानी चाहिए, व और अधिक सम्मानजनक होना चाहिये . उन्हें विश्वास करना चाहिए कि: 'दूसरी पार्टी इसलिये हारी ताकि हमें खुशी मिले.' यदि वे इस तरह से सोचते हैं, तो वे अपने खुशी-दाता को अपमानित नहीं करेंगे और हारे हुए का सम्मान करेंगे.
भगवान जानते हैं कि किसे कहाँ पर रखें. भगवान का निर्णय स्वीकार करो. लोगों को इस तरह से सोचना चाहिए. जीत और हार जीवन का हिस्सा हैं. इस पद्धति को पहचान कर इसके ऊपर उठना ही विकास की निशानी है.
April 12, 2009
अपना वोट अवश्य डालें- श्री श्री रवि शंकर जी
"आप जागेंगे तो देश जागेगा"
चाणक्य ने कहा "समाज की दुर्दशा के लिए दुर्जन की दुर्जनता से ज्यादा सज्जन की निष्क्रियता काम करती है."
"धूप, हवा, पानी, धरती इनके साक्षी हम बनेंगे और भारत में बदलाव लायेंगे"
सांस लें तो धर्म के लिए छोडें तो देश के लिए


