September 17, 2008

विश्राम का परम आनन्द

साप्ताहिक ज्ञानपत्र 314
19 जुलाई, 2001
उत्तरी अमेरिका आश्रम क्यूबेक
कैनेडा

विश्राम का परम आनन्द
विश्राम से भी आनन्द प्राप्त होता है और कर्म से भी आनन्द प्राप्त होता है। कर्म में मिला आनन्द क्षणिक होता है और उससे थकान होती है, जबकि विश्राम से मिला आनन्द महान और शक्तिप्रदायक होता है। इसलिए जिसने विश्राम (समाधि) के आनन्द का स्वाद चखा है उसके लिए कर्म का आनन्द बहुत तुच्छ है। हम जो भी कर्म कर रहें हैं वे इसीलिये कर रहें हैं ताकि हमें गहरा विश्राम मिल सके। कर्म करना हमारी प्रणाली का एक हिस्सा है। फिर भी सच्चा आनन्द समाधि में मिलता है। गहरे विश्राम को प्राप्त करने के लिए मनुष्य को सक्रिय होना पड़ेगा। दोनों के उचित संतुलन का होना आवश्यक है। अधिकांश लोग आनन्द इधर उधर ढूँढते रहते हैं परन्तु बुध्दिमान् व्यक्ति केवल मस्कुराता है। केवल ज्ञान में ही असली विश्राम है।

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