September 17, 2008

संभाषण की शक्ति प्वाइंट ऑफ़ पीस शिखर सम्मेलन, स्टैवेंजर, नार्वे

श्री श्री ने नोबल शांति पुरुस्कार से सम्मानित लोगों को किया उद्बोधन
कहा कि संसार में संघर्ष समाप्त करने के लिये संभाषण और मध्यस्थों का होना ज़रूरी

स्टैवेंजर, नार्वे 12 सितम्बर , 2008: विश्व विख्यात मानवीय और आध्यात्मिक नेता और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक परम पूज्य श्री श्री रविशंकर ने परस्पर संवाद की शक्ति पर जोर देते हुए कहा कि दुनिया में संघर्ष को अंत करने का यही उचित हल है।

वे सरकार द्वारा प्रायोजित प्वाइंट ऑफ़ पीस शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे जो पूर्व में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित लोग और संघर्ष के समाधान के विशेषज्ञों के बीच स्टैवेंजर, नार्वे में हो रही बैठक है। श्री श्री ने ज़ोर दिया कि मध्यस्थता द्वारा झगड़ते दलों को प्रभावी तरह से बातचीत पर लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि "आज विश्व में मध्यस्थों को बनाने की और परस्पर संवाद की एक बहुत अधिक आवश्यकता है। मध्यस्थ की भूमिका महत्वपूर्ण है और उसे बिना खुद को अधिरोपित करे हुए एक उत्प्रेरक की भूमिका निभानी है।"

इन योग्य और शांति के विश्व विख्यात नेताओं को संबोधित करते हुए , श्री श्री ने बताया है कि वह और आर्ट ऑफ लिविंग हिंसक प्रवृत्ति में सुधार और संवाद को बढ़ावा देने के पूरे विश्व में किस प्रकार कार्यरत हैं । तनाव को दुनिया में संघर्ष का मूल कारण बताते हुए, उन्होंने इस बात पर बल दिया कि तनाव को जड़ से हटाने वाली विधियों को अपनाया जाए।" “तनाव आपसी संचार में बाधा पैदा करता है। बातचीत के लिए किसी भी एक मध्यस्थ के होने की जरूरत है, और मध्यस्थ की कुशलता से सफल संवाद होता है।“
“किसी संघर्ष में हमेशा गलत सूचना, अफ़वाहें, और आंदोलन शामिल होते है। मध्यस्थ को आवश्यक्ता है कि वह लोगों को सुने और उनमें उम्मीद जगाए। सबसे ज़रूरी है कि मध्यस्थ परिस्थिति को भली भांति समझे ताकि मामला और अधिक नहीं भड़के।“

“अधिकांश संघर्ष किसी पहचान को बनाने के लिये आधारित होते हैं : हम अपनी पहचान को किसी धर्म, संस्कृति, भाषा आदि के साथ जोड़ लेते हैं और हम भूल जाते हैं कि हम सभी पहले इंसान हैं। धर्म, राष्ट्रीयता, लिंग आदि इंसानियत के बाद आते है। इस सीमित पहचान का गलत रस्ता लोगों को मरने मारने के लिए भी तैयार कर देता है। अमरीका में हुए 9/11 हमले के बाद अपने भय, अविश्वास और संघर्ष को जीतने के लिये हमें इस संकीर्ण विचारधारा से आगे निकलना होगा। आतंकवाद को समाप्त करने के लिये दूरदर्शी होकर हमें अपने बच्चों को बहुसांस्कृतिक व बहुधार्मिक शिक्षा देने होगा।"


यह तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन स्टैवेंजर शहर को दिये “2008 की यूरोपीय सांस्कृतिक राजधानी” उपाधि का एक हिस्सा है। बहुत बड़ी संख्या में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित जन एकत्रित हुए और विचारों का आदान प्रदान करा। श्री श्री को “संभाषण की शक्ति - 9/11 और उसके बाद क्या” विषय पर अपने विचार प्रकट करने के लिए आमंत्रित किया गया था। उनके अलावा पैनल में शामिल थे – दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति महामहिम किम दे जंग, नार्वे के पूर्व प्रधानमंत्री क्जेल माग्ने बॉंडेविक और अन्य।

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